पुरातत्व दीर्घा

पुरातत्व दीर्घा

यह दीर्घा भारत में मूर्तिकला की क्रमागत उन्नति दर्शाने के लिए समर्पित है। प्रदर्शित मूर्तियां दूसरी शताब्दी ईस्वी से पंद्रहवीं शताब्दी ईस्वी के समय की हैं जो बौद्ध, ब्राह्मणवादी और जैन धर्मों से संबंधित हैं। यह कलाकृतियाँ कुषाण, गुप्त, पाल-सेना, चंदेला, पल्लव, होयसला, विजयनगर और चोल काल की हैं। दीर्घा में बौद्ध और ब्राह्मणवादी मूल की कुछ दक्षिण – पूर्व एशियाई मूर्तियों भी प्रदर्शित हैं जिन्हें जावा और इंडोनेशिया से प्राप्त किया गया था।

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संग्रहालय का संग्रह

संग्रहालय के बारे में

1814 में एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल (वर्तमान में 1 पार्क स्ट्रीट पर स्थित एशियाटिक सोसाइटी की इमारत) द्वारा स्थापित भारतीय संग्रहालय सबसे पहला और केवल भारतीय उपमहाद्वीप में ही नहीं बल्कि विश्व के एशिया प्रशांत क्षेत्र का सबसे बड़ा बहुप्रयोजन संग्रहालय है।

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